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भैया का भाइंग

जब सीरियल का काम पटरी पर आ गया और उसने लोकप्रियता के नए आयाम तय करने शुरू किए तो अमर नेहा और बच्चों से मिलने के लिए व्यग्र हो गया। हालांकि उसकी शारीरिक जरूरत पूरी हो रही थी लेकिन उसे नेहा की चिंता लगी रही। दिन में लगभग दो-तीन बार वह नेहा से बात करता। उसकी व्यस्तता को देखते हुए नेहा भी चुप थी लेकिन आशंकित भी थी। अंधेरे कोने   भाग दस भैया का भाइंग रमेश ने जैसा सोचा था वैसा ही हुआ। मनोरंजन चैनलों ने सीरियल की डिमांड शुरू हो गई। प्रायोजक भी इतने मिल गए कि कइयों को इनकार करना पड़ गया। अनु को फिल्म प्रोडेक्शन कंपनी मंे काम करने का फायदा हुआ। अमर की घटना से एक सप्ताह बाद ही उसने प्रोडेक्शन कंपनी से इस्तीफा देकर अपनी कंपनी बना ली थी। स्क्रिप्ट अमर की तैयार थी ही। बस उसमें किसिंग सीन को जोड़ना था। चैनल से लेकर कलाकार और डायरेक्टर तक सभी एक माह में फाइनल कर लिए गये। कलाकर चयन मंे थियटर से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी गई। चूंकि किसिंग सीन के कारण अमर-अनु चर्चित हो गये थे इसलिए इन्हें मुख्य भूमिका निभानी थी। करीब डेढ़ माह की अथक मेहनत के बाद सीरियल प्रसारण के लिए त...

श्लीलता और अश्लीलता के बीच

आज जब उसे उगते सूरज को देखने का मौका मिला तो वह रोमांचित हो गया। वह मनोहारी सुबह को मुग्ध होकर देख रहा था कि उसके पास अनु भी आ गई।  अंधेरे कोने भाग नौ श्लीलता और अश्लीलता के बीच ठंड के एहसास से अमर की नींद खुल गई। उठकर बालकनी पर आया गया। उजाले ने अंधेरे को परास्त कर दिया था लेकिन क्षितिज में भाष्कर ने अभी अपनी उपस्थति दर्ज नहीं कराई थी। गली के पेड़ों पर चिड़ियां चहचहा रही थीं। आसमान में बादल के टुकडे़ इधर-उधर भाग रहे थे। अमर ने ऐसी सुबह बहुत दिनों बाद देखी थी। पत्रकारिता की नौकरी ऐसी है कि इसमें रात को जागना पड़ता है और दिन में सोना पड़ता है। कभी-कभी तो मोहल्ले वाले शक करने लगते हैं कि यह आदमी करता क्या है? शाम को जाता है और सुबह तीन बजे आता है। ड्यूटी का यह टाइम किसी की समझ में न आता लेकिन अखबार का काम तो शाम से ही आरंभ होता है। खासकरके उनका जो डेस्क पर काम करते हैं। रिपोर्टर फिर भी रात दस बजे तक निपट जाते हैं लेकिन डेस्क वाले तो शुरू ही तब होते हैं जब संवाददाताओं का काम खत्म होता है। संवाददाताओं की खबरों को संपादित करना और उनका सही जगह प्लेसमेंट करने ...

आग का दरिया है डूब कर जाना है ...

बाहर शाम से ही बादल घिर आए थे। दोनों बिस्तर में जैसे ही लेटे बाहर जोरदार बिजली चमकी और बादलों की गड़गड़ाहट देर तक सुनाई दी। धीरे-धीरे पानी की बंूदें आसमान से गिरनी शुरू हुईं जो बाद में तेज हो गईं। पूरी रात कभी तेज तो कभी धीमी बारिश होती रही। बीच-बीच में बिजली चमकती और बादल गड़गड़ाते रहे...।   अंधेरे कोने भाग आठ आग का दरिया है डूब कर जाना है ... अनु ने कार नोएडा फ्लाईओवर के बीचों बीच रोक दी। इसके नीचे पुल था जहां से दिल्ली से उत्तर पूर्व जाने आनेवाली रेलगाड़ियां आती-जाती हैं। बगल में मेट्रो रेल लाइन का एलीवेटर है। यमुना बैंक से अक्षरधाम होते हुए मयूर विहार फेस-वन से नोएडा सिटी सेंटर तक जाती है मेट्रो। दिल्ली वालों का हसीन सपना। जिसके दम पर एक पार्टी की महिला नेता तीसरी बार दिल्ली की मुख्यमंत्री बन गई। लेकिन इस चमक दमक वाली मेट्रो परियोजना ने अब तक सैंकड़ों मजदूरों की जान ले चुकी है। मजदूरों के शोषण से तैयार और तैयार हो रही यह परियोजना दिल्ली वालों को तत्काल सुविधा बेशक दे रही है लेकिन भविष्य में जो घाव और दर्द देगी उससे दिल्ली वालों की कई पीढ़ियां नहीं भुला पाएंगी...

आग का दरिया है डूब कर जाना है ...

बाहर शाम से ही बादल घिर आए थे। दोनों बिस्तर में जैसे ही लेटे बाहर जोरदार बिजली चमकी और बादलों की गड़गड़ाहट देर तक सुनाई दी। धीरे-धीरे पानी की बंूदें आसमान से गिरनी शुरू हुईं जो बाद में तेज हो गईं। पूरी रात कभी तेज तो कभी धीमी बारिश होती रही। बीच-बीच में बिजली चमकती और बादल गड़गड़ाते रहे...।     हिंदी.भारत@इंडिया     भाग आठ आग का दरिया है डूब कर जाना है ...   अनु ने कार नोएडा फ्लाईओवर के बीचों बीच रोक दी। इसके नीचे पुल था जहां से दिल्ली से उत्तर पूर्व जाने आनेवाली रेलगाड़ियां आती-जाती हैं। बगल में मेट्रो रेल लाइन का एलीवेटर है। यमुना बैंक से अक्षरधाम होते हुए मयूर विहार फेस-वन से नोएडा सिटी सेंटर तक जाती है मेट्रो। दिल्ली वालों का हसीन सपना। जिसके दम पर एक पार्टी की महिला नेता तीसरी बार दिल्ली की मुख्यमंत्री बन गई। लेकिन इस चमक दमक वाली मेट्रो परियोजना ने अब तक सैंकड़ों मजदूरों की जान ले चुकी है। मजदूरों के शोषण से तैयार और तैयार हो रही यह परियोजना दिल्ली वालों को तत्काल सुविधा बेशक दे रही है लेकिन भविष्य में जो घाव और दर्द देगी उससे दिल्ली वालों...