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झूठा निकला प्रस्तोता

टीवी स्क्रीन पर प्रस्तोता
कहता है मुस्करा कर
खबरों का सिलसिला जारी है
लेकिन एक छोट से ब्रेक के बाद
ब्रेक छोटा नहीं होता
इसके दबाव में छोटी हो जाती हैं खबरें
विज्ञापन के दावों की तरह
प्रस्तोता भी झूठा निकला

Comments

कथा कहानी पढ़ने पहुंचा था, किव महोदय गले पड़ गए। वैसे सामियक और सटीक है।
Udan Tashtari said…
बहुत सटीक रचना है, यथार्थ.
seema gupta said…
"ya very right and true, it happens always, "

Regards
Unknown said…
khoob .............
aaj to patarkarita hi bemani lagti hai.
dabaw wahan bhi hain. dabaw yahan bhi hai

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